बेरोजगारी बहुत है !

 शम्भू 

 वेरेजगारी बहुत है पर शम्भू  प्रसाद जी ने  इस संबंध  अपने विचारों लोगों के बीच लाने की कोशीश की है   

मेम साहब : हेलो हेलो ! नल की टोंटी लीक कर रही है प्लम्बर भैया ! इसे बदल दो आकर प्लीज।

प्लम्बर : जी मेम साहब ! ठीक है । पर अभी समय नहीं है । परसों बदल जाऊंगा ।

परसों :

मेम साहब : भैया तुम आये नहीं । आज टोंटी बदलने को कहा था तुमने ।

प्लम्बर : मेम आ रहा हूँ । शाम तक आपका काम हो जाएगा।

शाम को प्लम्बर : मेम, आज नहीं आ पा रहा । कल अवश्य आऊंगा ।

कल :

प्लम्बर : ये लो मेम हो गया आपका काम ।

मेम साहब : ठीक है भैया । थैंक्स । कितने देने हैं !

प्लम्बर : 280 की टोंटी, 20 का टेप, 300, और लेबर के 400 रुपये । टोटल ₹700 दीजिये मेम ।

मेम साहब : अरे भैया ! 700 तो बहुत ज्यादा हैं। और आधे घंटे के ₹400 लेबर कुछ ज्यादा नहीं लगा रहे आप? 

प्लम्बर : नहीं मेम दूसरी जगह चलता काम छोड़ कर आया हूँ । घिस घिस मत करो । ₹700 निकालो जल्दी । दूसरी जगह जाना है । पहले पूछ लिया करो । *आदमी हैं नहीं ।* अकेले काम करना पड़ता है ।

मेम साहब : ठीक है । ये लो भैया । पर तुम्हारे रेट बहुत ज्यादा हैं ।

प्लम्बर : अरे मेम ! आपको क्या पता ! मरने की फुरसत नहीं है। नमस्ते ।

आपने देखा, एक प्लम्बर का किस्सा ।

आदमी हैं नहीं और बेरोजगारी बहुत है । समझे !!

अब और देखिए – 

ज्योति : आंटी ! कल से बहू और बच्चे की मालिश के ₹300  घंटा लूंगी ।

आंटी : क्यों ज्योति ! अभी तक तो 200 लेती थी ।

ज्योति : आंटी, फुरसत नहीं है । दो घर और भी जाना पड़ेगा कल से ।

आंटी : तो दो घर जाने से रुपये बढ़ाने का क्या मतलब है ? बल्कि तुझे तो 200 के हिसाब से और 400 मिलेंगे ।

ज्योति : देख लो आंटी । उनसे भी ₹300 के हिसाब से तय हुए हैं । आपको करानी है, तो ठीक नहीं तो कल 1 तारीख है मैं नहीं आऊंगी । किसी और से करा लेना ।

आंटी : अरे ! अब बीच में किसे ढूंढूंगी ? तू ही आ । जो कहेगी, देंगे ।

ज्योति : ठीक है । अब तक का हिसाब कर दो । कल से नया  ₹300 के हिसाब से चालू हो जाएगा ।

दुखी मन से आंटी : ये ले 4 दिन के बाकी 800 । कल टाइम से आना ।

आपने देखा । एक घंटे के 300 । पांच जगह भी गयी, तो 1500 । मतलब 1500×25 दिन =₹ 37,500 महीना ।

बेरोजगारी बहुत है ।

पर है कहाँ है ये बेरोजगारी ?

अब आप ही बताइये बेरोजगारी कहां है ?

मुझे दो स्टाफ चाहिए आफिस के लिए । अरोड़ा जी को एक लड़का चाहिए दुकान के लिए । गुप्ताजी को बाई चाहिए । मधु भाभी को झाड़ू पोंछे वाली चाहिए । विकास को एक कारपेंटर चाहिए । प्रमोद को स्टील का गेट बनवाना है । शर्मा जी को टाइल लगवानी है दुकान पर !!

क्या करें  – कहाँ जाएं ! 2-3 महीने से सब लोग ढूंढ रहे हैं *आदमी ।*

पर सुनने में आता है, बेरोजगारी बहुत है ।

भैया किधर है ये ? कौन है बेरोजगार ? हमें दिखाओ तो !

हाँ मैं दिखाता हूँ । देखिए ।

आओ मोहन । दुकान पर काम करोगे ?

मोहन : जी करूंगा बाबू जी ।

बाबू जी : तो आओ कल से सुबह 9 बजे ।

मोहन : न बाबूजी । सुबह 9 नहीं साढ़े दस तक आ पाऊंगा ।

बाबूजी : ठीक है, मैं खोल लूंगा दुकान तुम साढ़े दस आओ ।

मोहन : बाबूजी, पगार कितनी दोगे ?

बाबूजी : अरे पहले जो लड़का था, उसे ₹9000 देता था । वही दे दूंगा । या जो तू कहेगा ।

मोहन : बाबूजी रुपये लूंगा पूरे 15 हजार ।

बाबू जी : क्यों कहीं और मिल रहे हैं क्या ?

मोहन : नहीं । अभी तो कोई नहीं, पर ढूंढ लूंगा ।

बाबूजी : लेकिन तुमने तो अभी बताया 4 महीने से घर बैठे हो । कोई नौकरी नहीं मिली ।

मोहन : हाँ बाबूजी । पर 8-9 हजार में आजकल होता क्या है ? इसलिए काम जोड़ा नहीं अभी तक । देखूंगा । जब अच्छी पगार वाली मिलेगी, तब करूंगा नौकरी ।

समझ गए आप ।

बेरोजगारी कहां है ?

9 की करनी नहीं । 15 की मिल नहीं रही ।

सरकार है न !

राशन फ्री ।

बिजली पानी फ्री।

खाने के लिए छेत्तर बहुत हैं ।

इलाज फ्री ।

कन्या विवाह के लिए राशि ।

बच्चा पैदा हो, तो राशि आदि-आदि ।

यहां है बेरोजगारी !!

*काम वालों को आदमी नहीं और आदमियों को काम नहीं ।*

सोचिएगा अव ………

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