त्रासदी : बिहार राज्य से 2009 के बाद एक भी निर्दलीय उम्मीदवार नहीं पहुंच सके संसद ….

दिनेश कुमार अकेला 

 0 2009 एवं 2014 में 36 % बढे निर्दलीय उम्मीदवार जब कि बिहार राज्य  से 16 बार ही निर्दलीय उम्मीदवार सांसद चुने गए ,जब कि पिछ्ले 2 चुनावों में सभी निर्दलीय उम्मीदवारो की जमानत जप्त हो गई । 

0 2014 के मुक़ाबले 2019 के चुनाव में कुल उम्मीदवारों की संख्या 607 से  626 हो गई। 

 0 निर्दलीय 169 से 230 हो गए, जो गत चुनाव की तुलना में 36% बढे, पर जमानत भी नहीं बचा पाए। 

 0 वर्ष 2019 में 304 में मात्र 4 निर्दलीय उम्मीदवार की जमानत बच पाई थी।इसमें 2 चुनाव जीते थे।

  बिहार राज्य मल्लिकमें  लोकसभा चुनाव के बाद एक भी निर्दलीय उम्मीदवार को जनता ने सांसद बनने का मौका नहीं दिया। यानी सौ प्रतिशत निर्दलियों की जमानत जप्त हो गई। 2009 में बांका से दिग्विजय सिंह और सिवान से ओमप्रकाश यादव निर्दलीय जीते थे। बांका सांसद की मौत के बाद 2010 के उप चुनाव में उनकी पत्नी पुतुल कुमारी निर्दलीय उम्मीदवार चुनकर लोकसभा पहुंची थी।  लोकसभा चुनाव के इतिहास में बिहार से 1967 में सबसे अधिक 4 निर्दलीय सांसद चुने गए। इसमें चतरा से वी राजा, हाजीपुर से बीएन सिंह, नवादा से एम एस पी एन पुरी और सिंहभूम से एन पी यादव भारी मतों से जीत कर लोकसभा पहुंचे थे।तब झारखंड राज्य बिहार का ही हिस्सा था।  वहीं, 2 निर्दलीय को 1952 में शाहाबाद उत्तर पश्चिम और 1857 में  बक्सर लोकसभा सीट से लगातार 2 बार भारी मतों से कमल सिंह को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनकर लोकसभा भेजा। वहीं, 1977  और 1980 में  धनबाद लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर एके राय लगातार 2 बार भारी मतों से जीत कर लोकसभा पहुंचे।     

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